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उत्तराखंड मौसम अपडेट: भीषण गर्मी के बीच करवट लेगा मौसम, 13 जून के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी

देहरादून: उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से पड़ रही झुलसाने वाली गर्मी और उमस से लोगों को फौरी राहत मिलने वाली है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 जून 2026 के लिए प्रदेश के कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। पहाड़ों पर भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ-साथ, 4200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में जून के महीने में भी बर्फबारी होने की रोमांचक संभावना जताई गई है।

13 जून: प्रदेश में कैसा रहेगा मौसम का मिजाज?

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक सीएस तोमर के अनुसार, मौसम में इस अचानक बदलाव से अलग-अलग क्षेत्रों में निम्नलिखित प्रभाव देखने को मिलेंगे:

  • उच्च हिमालयी क्षेत्र (बर्फबारी और बारिश): उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ (खासकर 4200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर) हल्की से मध्यम बारिश, तेज गर्जन और बर्फबारी का अनुमान है।
  • मध्यम पर्वतीय क्षेत्र (तेज बौछारें): देहरादून, टिहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल के कई इलाकों में तेज बारिश और आंधी-तूफान की संभावना बनी हुई है।
  • मैदानी इलाके (आंधी और छिटपुट बारिश): हरिद्वार और उधम सिंह नगर में 40 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं और कहीं-कहीं हल्की बारिश व बिजली चमकने के आसार हैं।

तापमान में उतार-चढ़ाव: अगले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाएगी। हालांकि, यह राहत अस्थायी होगी और बारिश का दौर थमने के बाद अगले 3-4 दिनों में तापमान फिर से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा।

14 से 18 जून तक का पूर्वानुमान

आने वाले दिनों में मौसम का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा:

दिनांकपर्वतीय क्षेत्रमैदानी क्षेत्र (हरिद्वार, उधम सिंह नगर)
14 जूनकई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश।40-50 किमी/घंटे की हवाओं के साथ छिटपुट बारिश।
15 जूनउत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर व पिथौरागढ़ में बारिश जारी।मौसम साफ और शुष्क रहने की उम्मीद।
16 – 18 जूनकेवल उच्च हिमालयी जिलों में हल्की बारिश के आसार।मौसम पूरी तरह साफ रहेगा, तेज धूप खिलेगी।

चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए अलर्ट

मौसम विभाग ने विशेष रूप से चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं और पहाड़ी मार्गों पर सफर कर रहे पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी की है:

  • सतर्क रहें: ‘ऑरेंज अलर्ट’ का अर्थ है कि मौसम सामान्य से अधिक खराब हो सकता है।
  • खतरों से बचाव: भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण पहाड़ों पर भूस्खलन (Landslide), पत्थर गिरने और सड़कों पर फिसलन का खतरा बढ़ जाता है।
  • यात्रा से पहले अपडेट लें: सुरक्षित स्थानों पर रहें, यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का ताज़ा अपडेट जरूर लें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें।
उत्तराखंड के लिए बड़ी खबर: जून 2028 तक ब्यासी और दिसंबर 2029 तक कर्णप्रयाग पहुंचेगी ट्रेन

ऋषिकेश: उत्तराखंड के पहाड़ों में रेल दौड़ाने के सपने को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। देवभूमि की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की नई समयसीमा (Timeline) तय कर दी गई है। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अनुसार, जून 2028 तक पहले चरण के तहत ब्यासी तक ट्रेन सेवा शुरू हो जाएगी, जबकि दिसंबर 2029 तक अंतिम स्टेशन कर्णप्रयाग तक रेल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

हाल ही में रेलवे की स्थायी संसदीय समिति ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का जमीनी निरीक्षण कर काम की रफ्तार का जायजा लिया।

संसदीय समिति ने किया दौरा, कार्यों की समीक्षा की

संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष डॉ. सीएम रमेश के नेतृत्व में 20 सांसदों के एक दल ने 8 और 9 जून को परियोजना का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने ऋषिकेश से लेकर धारी देवी क्षेत्र तक जाकर सुरंग निर्माण और स्टेशनों के कार्यों को देखा। इसके बाद आरवीएनएल के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई, जिसमें प्रोजेक्ट की प्रगति और भविष्य के रोडमैप पर चर्चा हुई।

दो चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट: नया शेड्यूल

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और पहाड़ों की चुनौतियों के कारण परियोजना की समयसीमा में थोड़ा बदलाव किया गया है। अब इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा:

  • पहला चरण (जून 2028): योगनगरी ऋषिकेश से ब्यासी तक ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इस 27.69 किलोमीटर लंबे खंड में ट्रैक बिछाने और स्टेशन निर्माण का काम युद्धस्तर पर जारी है।
  • दूसरा चरण (दिसंबर 2029): परियोजना को पूरी तरह से समाप्त कर ट्रेन को कर्णप्रयाग तक पहुंचा दिया जाएगा। (इससे पहले यह लक्ष्य दिसंबर 2028 था)।

रूट पर बनेंगे कुल 13 रेलवे स्टेशन

इस 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन पर कुल 13 स्टेशन होंगे, जो गढ़वाल के विभिन्न प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ेंगे:

स्टेशन का प्रकारस्टेशनों के नाम
पहले से संचालितबीरभद्र, योगनगरी ऋषिकेश
निर्माण कार्य जारीशिवपुरी, ब्यासी
टेंडर प्रक्रिया पूरी (जल्द काम शुरू)देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारी देवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर, कर्णप्रयाग

83% सफर सुरंगों के अंदर: ‘इंजीनियरिंग का कमाल’

इस पूरी रेल परियोजना की सबसे अनोखी और चुनौतीपूर्ण बात यह है कि इसका लगभग 83 प्रतिशत हिस्सा (104 किलोमीटर) सुरंगों के भीतर से गुजरेगा।

  • प्रोजेक्ट में कुल 16 मुख्य सुरंगें और 12 निकास (Exit) सुरंगें बनाई जा रही हैं।
  • राहत की बात यह है कि 16 में से 13 मुख्य सुरंगों की खुदाई पूरी हो चुकी है।
  • अब तक लगभग 98 किलोमीटर सुरंग का निर्माण हो चुका है, जो कुल कार्य का 95% है।
  • सबसे बड़ी चुनौती: ढालवाला से शिवपुरी के बीच बन रही 10.8 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई अभी भी जारी है, जिसे इस रूट का सबसे कठिन हिस्सा माना जा रहा है।

सामरिक और धार्मिक दृष्टि से क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

  1. चारधाम यात्रा को रफ्तार: इस रेल लाइन के शुरू होने से बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए सफर बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगा।
  2. पहाड़ों का विकास: पर्वतीय जिले सीधे देश के रेल नेटवर्क से जुड़ेंगे, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
  3. देश की सुरक्षा (सामरिक महत्व): सीमावर्ती क्षेत्रों (Border areas) तक भारतीय सेना और रसद की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी, जिससे यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी गेम-चेंजर साबित होगी।