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गुटबाजी की बीमारी से ग्रस्त उक्रांद

उत्तराखंड में कभी “जय पहाड़, जय पहाड़ी” के नारे की गूंज राजनीतिक बदलाव की उम्मीद जगाती थी। लेकिन इस नारे को राजनीतिक ताकत देने वाला उत्तराखंड क्रांति दल यानी उक्रांद एक बार फिर अपनी पुरानी बीमारी से जूझता नजर आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी की बढ़ी सक्रियता से यह उम्मीद जरूर जगी...

तीर्थ या टूरिज्म डेस्टिनेशन? देवभूमि में आस्था के बदलते मायने

बदरीनाथ से केदारनाथ तक—आस्था के बाजार में संस्कृति का नया पैकेज कहते हैं बदरीनाथ में शंख नहीं बजता। अब आप सोचिए, जिस जगह भगवान विष्णु का प्रिय शंख भी शांत रहता है, वहां शायद मौन की क्या  कीमत होगी। किसी ने कभी सोचा होगा कि इतनी ऊंचाई पर, बर्फ से घिरे पहाड़ों के बीच, मंदिर...

मुख्यमंत्री आवास के बैरियर पर रोकी गईं महिला कांग्रेस कार्यकर्ता, भजन-कीर्तन कर जताया विरोध

देहरादून में रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने जा रहीं महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बैरियर पर रोक दिया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में कार्यकर्ता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ‘न्याय की राखी’ बांधने के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर जा रही थीं। पुलिस द्वारा आगे...

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कैबिनेट मंत्रिमंडल की बैठक आज

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कैबिनेट के निर्णय

1.राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद उत्तराखंड में ड्रग फ्री मुहिम और तेज होगी। अभी तक एंटी नारकोटिक्स टॉस्क फोर्स में पुलिस फोर्स से प्रतिनियुक्ति पर कार्मिक लिए जा रहे थे। टॉस्क फोर्स का गठन 2022 में किया गया था। अब इस फोर्स के लिए अलग से ढांचा खड़ा करने की शुरूआत हुई है। इस क्रम में राज्य मुख्यालय में पहली बार 22 पदों का सृजन किया गया है। एक पुलिस उपाधीक्षक, दो ड्रग निरीक्षक, एक निरीक्षक, दो उपनिरीक्षक, चार मुख्य आरक्षी और आठ आरक्षी, दो आरक्षी चालक समेत कुल 22 पद सृजित किए जाएंगे।

2.राज्य मंत्रिमंडल ने वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतनमान दिए जाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंत्रिमंडलीय उप-समिति ने सरकार को संस्तुति दी थी। इस आधार पर सरकार ने 589 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को न्यूनतम 18 हजार रूपये वेतन देने का निर्णय लिया है। वन विभाग/वन विकास निगम में कार्यरत दैनिक श्रमिकों की कुल संख्या 893 है, जिसमें से 304 श्रमिकों को पूर्व से ही न्यूनतम वेतनमान का लाभ प्राप्त हो रहा है।

3.राज्य मंत्रिमंडल ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना (ईएसआई) के अंतर्गत चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सा अधिकारियों और उच्चतर पदों की सेवा-शर्तों के निर्धारण के संबंध में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस क्रम में उत्तराखण्ड कर्मचारी राज्य बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवा नियमावली, 2026” को प्रख्यापित किया गया है, जिसके तहत कुल 94 पद होगें। इनमें 76 चिकित्सा अधिकारी, 11 सहायक निदेशक, छह संयुक्त निदेशक और एक अपर निदेशक का पद शामिल है। इससे पहले, ईएसआई के ढांचे में एक सीएमओ और 13 चिकित्सा अधिकारी के पद शामिल थे।

4.मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि वित्तीय वर्ष 2025-26 तक विस्तारित किए जाने के संबंध में भी राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा केंद्र प्रायोजित योजना प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को एक वर्ष के लिए 31 मार्च 2026 (वित्तीय वर्ष 2025-26) तक बढ़ाया गया है।

इस क्रम में राज्य सेक्टर के अंतर्गत संचालित “मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की कार्यान्वयन अवधि को भी वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिनांक 31 मार्च 2026) तक विस्तारित करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया है कि भविष्य में यदि भारत सरकार के स्तर पर इस योजना की अवधि विस्तारित होती है, तो राज्य में भी इसे विस्तारित माना जाएगा।

5.राज्य मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) अधिनियम, 2026 के प्रारूपण के संबंध में भी निर्णय लिया है। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों में यह निर्देशित किया गया है कि कारागार नियमावलियों/मॉडल प्रिजन मैनुअल में प्रयुक्त “आदतन अपराधी (Habitual offenders)” शब्द की परिभाषा संबंधित राज्य विधानमंडलों द्वारा अधिनियमित कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए। संशोधन विधेयक को आगामी सत्र में माननीय उत्तराखंड विधान सभा के समक्ष पुनः स्थापित किए जाने की राज्य मंत्रिमंडल ने अनुमोदन प्रदान कर दिया है।

6.कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान उद्योगों को राहत प्रदान किए जाने के उद्देश्य से बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया था कि नियोजक के पास आवंटनीय अधिशेष (Allocable Surplus) उपलब्ध होने की स्थिति में ही कर्मचारियों को न्यूनतम बोनस का भुगतान किया जाएगा।

उक्त विधेयक में किए गए प्रावधानों के संबंध में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा असहमति व्यक्त की गई। साथ ही वर्तमान में कोविड-19 महामारी जैसी परिस्थितियाँ विद्यमान न होने तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित विधेयक को राष्ट्रपति की अनुमति के बिना विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग, उत्तराखण्ड शासन को उपलब्ध कराए जाने के कारण विधेयक को आगे बढ़ाया जाना संभव नहीं हो पाया। उपरोक्त तथ्यों के दृष्टिगत बोनस संदाय (उत्तराखण्ड संशोधन) विधेयक, 2020 को यथास्थिति विधान सभा से वापस लिए जाने का निर्णय राज्य सरकार द्वारा लिया गया है।

Team 52 Garh

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