ताजा खबरें

New Recipe

गुटबाजी की बीमारी से ग्रस्त उक्रांद

उत्तराखंड में कभी “जय पहाड़, जय पहाड़ी” के नारे की गूंज राजनीतिक बदलाव की उम्मीद जगाती थी। लेकिन इस नारे को राजनीतिक ताकत देने वाला उत्तराखंड क्रांति दल यानी उक्रांद एक बार फिर अपनी पुरानी बीमारी से जूझता नजर आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी की बढ़ी सक्रियता से यह उम्मीद जरूर जगी...

तीर्थ या टूरिज्म डेस्टिनेशन? देवभूमि में आस्था के बदलते मायने

बदरीनाथ से केदारनाथ तक—आस्था के बाजार में संस्कृति का नया पैकेज कहते हैं बदरीनाथ में शंख नहीं बजता। अब आप सोचिए, जिस जगह भगवान विष्णु का प्रिय शंख भी शांत रहता है, वहां शायद मौन की क्या  कीमत होगी। किसी ने कभी सोचा होगा कि इतनी ऊंचाई पर, बर्फ से घिरे पहाड़ों के बीच, मंदिर...

मुख्यमंत्री आवास के बैरियर पर रोकी गईं महिला कांग्रेस कार्यकर्ता, भजन-कीर्तन कर जताया विरोध

देहरादून में रक्षाबंधन के मौके पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने जा रहीं महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बैरियर पर रोक दिया। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में कार्यकर्ता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ‘न्याय की राखी’ बांधने के लिए मुख्यमंत्री आवास की ओर जा रही थीं। पुलिस द्वारा आगे...

आपकी आवाज, आपका समाचार

उत्तराखंड की राजनीति में नया अध्याय: धामी सरकार के 5 साल पूरे, उपलब्धियों और चुनौतियों का लेखा-जोखा

Table of Content

देहरादून (4 जुलाई 2026): उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास में आज का दिन बेहद खास है। 4 जुलाई 2021 को सत्ता की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल के सफलतापूर्वक 5 वर्ष पूरे कर लिए हैं। राज्य गठन के बाद से लगातार मुख्यमंत्रियों के बदलने के मिथक को तोड़ते हुए वह 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले पहले भाजपा मुख्यमंत्री बन गए हैं। इस ऐतिहासिक मौके पर सरकार ने ‘सेवा सप्ताह’ का आगाज किया है, जिसके जरिए जनता तक सरकार की उपलब्धियों को पहुंचाया जा रहा है।

हालांकि, आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले, इन 5 सालों के सफर का मूल्यांकन सफलताओं और चुनौतियों, दोनों पैमानों पर किया जा रहा है।

ऐतिहासिक फैसले और विकास के दावे

धामी सरकार ने अपने इस कार्यकाल को “सुशासन, विकास और संकल्प” का नाम दिया है। सरकार के दावों और प्रमुख फैसलों पर नजर डालें तो कई अहम उपलब्धियां सामने आती हैं:

  • कड़े और ऐतिहासिक कानून: देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर उत्तराखंड ने इतिहास रचा। इसके अलावा, देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून और कड़े भू-कानून लागू किए गए। सरकार ने अवैध अतिक्रमण, मजारों और मदरसों पर कार्रवाई कर ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई।
  • रोजगार और महिला सशक्तिकरण: पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के जरिए 30,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गईं। महिलाओं के लिए सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण सुनिश्चित किया गया और ‘लखपति दीदी योजना’ के तहत 2.5 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया।
  • अर्थव्यवस्था और निवेश: ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में हुए समझौतों (MoU) में से 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतारा गया। राज्य की GSDP और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
  • बुनियादी ढांचा और आपदा प्रबंधन: चारधाम ऑल-वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और रोपवे जैसी ढांचागत परियोजनाओं ने गति पकड़ी। सिलक्यारा टनल हादसे में सफल रेस्क्यू ऑपरेशन कर सरकार ने आपदा प्रबंधन का शानदार उदाहरण पेश किया।

विपक्ष के निशाने पर ‘डबल इंजन’ और जमीनी हकीकत

उपलब्धियों के इन दावों के समानांतर, विपक्ष और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने सरकार की खामियों को भी मुखरता से उठाया है।

  • पलायन और बेरोजगारी: कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का आरोप है कि पहाड़ों से युवाओं का पलायन आज भी बदस्तूर जारी है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के सीमित अवसर अभी भी सबसे बड़ी समस्या बने हुए हैं।
  • पर्यावरणीय संकट: पर्यावरणविदों का तर्क है कि अनियोजित और तेज विकास कार्यों के कारण राज्य में भूस्खलन, बाढ़ और वनों के कटान जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ी हैं।
  • कानून व्यवस्था और जनसुविधाएं: अंकिता भंडारी जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों में पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम, महंगाई और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव आम जनता की शिकायत का बड़ा कारण रहा।
  • मुद्दों से भटकाव का आरोप: विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार रोजगार और महंगाई जैसे असल मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए UCC और धार्मिक ध्रुवीकरण का सहारा ले रही है।

2027 के चुनाव: जनता की अदालत में क्या होगा फैसला?

सियासी जानकारों और हालिया जनमत सर्वेक्षणों (Opinion Polls) के अनुसार, 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद कांटे की टक्कर वाला होने जा रहा है।

  • बंटा हुआ जनमत: शहरी मतदाता और हिंदुत्व समर्थक वर्ग UCC, कड़े कानूनों और राजनीतिक स्थिरता के लिए सरकार की तारीफ कर रहा है। वहीं, पहाड़ी क्षेत्रों के युवा, किसान और पर्यावरण प्रेमी वर्ग स्थानीय रोजगार और पलायन के मुद्दे पर खासे नाराज नजर आ रहे हैं।
  • चुनावी गणित: कुछ सर्वे भाजपा को 36-42 सीटों के साथ फिर से मजबूत स्थिति में दिखा रहे हैं, तो कुछ में कांग्रेस सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) के सहारे कड़ी चुनौती पेश करती दिख रही है।

पुष्कर सिंह धामी के 5 सालों ने उत्तराखंड को वह राजनीतिक स्थिरता दी है, जिसकी राज्य को लंबे समय से दरकार थी। केंद्र के सहयोग से इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। लेकिन, ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ वाले जुमले के बीच, पलायन और पर्यावरण जैसे बुनियादी सवाल आज भी खड़े हैं। 2027 के चुनावों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता धामी सरकार के कड़े फैसलों और स्थिरता पर मुहर लगाती है, या फिर अधूरी अपेक्षाओं के चलते बदलाव का बटन दबाती है।

Team 52 Garh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

खबरे अभी अभी

अगर आप उत्तराखंड के किसी गावं से है और अपने गाव की समस्या को प्रदेश सरकार व जनता तक लाना चाहते है तो आप हमारे ग्रुप में जुड़ सकते है,

सम्पादकीय

देहरादून

विचार

सफलता और संघर्ष

©2023. All rights reserved 52 Garh Samachar. Developed & Design By Velametric Global. Contact: 9389394933