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मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार

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रेशम, साइलेज व सामूहिक खेती से मजबूत होगी किसानों की आर्थिकी

उत्तराखंड में सहकारिता के माध्यम से बहुउद्देशीय सहकारी समितियों को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से व्यापक कार्य किया जा रहा है। कृषि, मिलेट्स, रेशम उत्पादन, सब्जी क्रय, बायोफर्टिलाइजर वितरण, साइलेज विक्रय और सामूहिक सहकारी खेती जैसी गतिविधियों से समितियों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है तथा किसानों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूती मिल रही है।

राज्य में मिलेट्स मिशन के अंतर्गत 214 क्रय केंद्रों के माध्यम से लगभग 53,000 कुंतल मंडुवा की खरीद की गई है। इस खरीद पर सहकारी समितियों को ₹100 प्रति कुंतल सेवा शुल्क के आधार पर लगभग ₹53 लाख की आय प्राप्त हुई है।

इसी प्रकार मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना के अंतर्गत सहकारी समितियों के माध्यम से साइलेज का वितरण किया जा रहा है। राज्य में कुल 181 केंद्रों (गढ़वाल में 96 और कुमाऊं में 85) के माध्यम से लगभग 20,000 टन उच्च गुणवत्ता का साइलेज विक्रय किया गया है, जिससे सहकारी समितियों को लगभग ₹63 लाख की आय प्राप्त हुई है।

उत्तराखंड सहकारी संघ के माध्यम से टिहरी और उत्तरकाशी जनपदों में पांच सहकारी समितियों द्वारा किसानों से सीधे सब्जियों की खरीद की जा रही है। वर्तमान वर्ष में अब तक किसानों से लगभग ₹1.50 करोड़ मूल्य की सब्जियों की खरीद की जा चुकी है, जिन्हें बाजार में बेहतर मूल्य पर विक्रय किया गया है। इस प्रक्रिया में सहकारी समितियों को लगभग ₹3 लाख की आय प्राप्त हुई है।

आगामी 1 अप्रैल से 22 सहकारी समितियों के माध्यम से सब्जी क्रय कार्य का विस्तार किया जाएगा, जिससे समितियों को 2 प्रतिशत लाभांश प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त बायोफर्टिलाइजर के क्रय-विक्रय में भी सहकारी समितियां सक्रिय रूप से भागीदारी निभा रही हैं, जिससे 14 समितियों को लगभग ₹68.38 लाख की आय प्राप्त हुई है।

इसी क्रम में धान खरीद कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य की 115 गृह सहकारी समितियों को लगभग ₹63 लाख की आय प्राप्त हुई है।

सहकारिता क्षेत्र में रेशम उत्पादन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन अपने सदस्य कीटपालन सहकारी समितियों के माध्यम से कच्चे रेशम कोया का उत्पादन कराता है और जिन कीटपालकों को अपने उत्पाद के विपणन में कठिनाई होती है, उन्हें 100 प्रतिशत विपणन सुविधा और त्वरित भुगतान उपलब्ध कराया जाता है।

वर्तमान में राज्य में लगभग 6500 रेशम कीटपालक रेशम उत्पादन से जुड़े हुए हैं। इनमें से लगभग 4000 कीटपालकों से फेडरेशन द्वारा करीब 25,000 किलोग्राम कच्चे रेशम कोया की खरीद की जाती है। इस कच्चे रेशम को पूर्ण उत्पादन श्रृंखला में उपयोग करते हुए विभिन्न प्रकार के रेशमी उत्पाद तैयार किए जाते हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्तराखंड को-ऑपरेटिव रेशम फेडरेशन द्वारा लगभग ₹6.30 करोड़ मूल्य के रेशम उत्पादों का उत्पादन किया गया, जबकि ₹2.53 करोड़ के रेशम वस्त्रों का विक्रय किया गया।

उत्तराखंड सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों, कीटपालकों और बुनकरों को बाजार से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

बयान-

राज्य सरकार लक्ष्य प्रदेश में सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। सहकारिता का सीधा लाभ किसानों, काश्तकारों, कारीगरों और युवा उद्यमियों को मिले इसके लिये ठोस नीतियां तैयाकर कर धरातल पर उतारी जा रही है।

Team 52 Garh

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